Bhagavad Gita Chapters wise Quotes in Hindi
| Bhagavad Gita Chapters | ||
| 1. अर्जुन विषाद योग | 2. सांख्य योग | 3. कर्म योग |
| 4. ज्ञान कर्म संन्यास योग | 5. कर्म संन्यास योग | 6. ध्यान योग |
| 7. ज्ञान विज्ञान योग | 8. अक्षर ब्रह्म योग | 9. राजविद्या राजगुह्य योग |
| 10. विभूति योग | 11. विश्वरूप दर्शिन योग | 12. भक्ति योग |
| 13. क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग | 14. गुणत्रय विभाग योग | 15. पुरुषोत्तम योग |
| 16. दैवासुर सम्पद विभाग योग | 17. श्रद्धात्रय विभाग योग | 18. मोक्ष संन्यास योग |
श्रीमद् भगवद्गीता पंचम अध्याय – कर्म संन्यास योग
श्रीमद् भगवद्गीता के पांचवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण कर्मयोग और संन्यासयोग के समान फल की बात करते हैं। कर्मयोग संन्यास से सरल और श्रेष्ठ है। समदृष्टि रखने वाला सिद्ध पुरुष सभी प्राणियों में आत्मा समान देखता है। निष्काम कर्मी कमल पत्र की भाँति पाप से लिप्त नहीं होता। कर्मयोगी अंतःकरण शुद्धि के लिए कर्म करता है।
कर्मयोग संन्यासयोग से श्रेष्ठ है। दोनों ही आत्मदर्शन कराते हैं। सबमें समान दृष्टि रखने वाला सिद्ध पुरुष है। मन शुद्धि कर्म से होती है। योगी सबका कल्याण चाहता है।
कर्मफल त्यागी शांतिमय जीवन जीता है। आत्मा न पाप ग्रहण करती है न पुण्य। विषय भोग सुख क्षणिक और दुखदायी हैं। काम-क्रोध को जीतने वाला ही सच्चा योगी है। अंतर्मुखी सुख और आत्मप्रकाश से परम शांति मिलती है।
Quotes from Bhagavad Gita Chapter 5 – Karma Sannyasa Yoga
कर्मयोग संन्यास से सरल और श्रेष्ठ मार्ग है।

Shrimad Bhagavad Gita Gyana Karma Sanyasa Yoga Quotes
समदृष्टि रखने वाला ही सच्चा सिद्ध पुरुष।

भागवत गीता अध्याय 5 ज्ञान कर्म संन्यास योग
निष्काम कर्मी कमल पत्र की तरह पाप से मुक्त।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 5 कर्म संन्यास योग कोट्स
कर्म से अंतःकरण शुद्धि होती है।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 5 कर्म संन्यास योग उद्धरण
कर्मफल त्यागी परम शांति पाता है।

Chapter wise Bhagavad Gita Teachings Quotes
आत्मा न पाप ग्रहण करती न पुण्य।

Bhagavad Gita – Quotes of Chapter 5 – Karma Sannyasa Yoga
विषय भोग सुख क्षणिक और दुखदायी होता है।

Wisdom Quotes Bhagavad Gita Chapter 5 – Karma Sannyasa Yoga
काम-क्रोध पर विजय पाने वाला सुखी रहता है।

Bhagavad gita quotes with chapters hindi
अंतर्मुखी सुख ही अक्षय आनंद है।

quotes in hindi from Bhagavad Gita Chapter 5 – Karma Sannyasa Yoga
आत्मप्रकाश से ब्रह्मनिर्वाण मिलता है।

Bhagavad Gita Karma Sannyasa Yog Quotes
सभी प्राणियों में समान भाव रखो।

bhagavad gita quotes chapterwise
विद्या-विनय संपन्न ब्राह्मण श्रेष्ठ होता है।

Bhagwat Geeta Learnings Chapter Wise Hindi
योगी भगवान को सबका उपभोक्ता मानता है।

भगवत गीता श्लोक हिंदी कर्म संन्यास योग Karma Sannyasa Yoga
बाहर के विषय त्याग अंतर्मुख बनो।

श्रीमद् भगवद्गीता पंचम अध्याय – कर्म संन्यास योग
द्वेषरहित, वैरागी ही सच्चा योगी है।

Quotes from Bhagavad Gita Chapter 5 – Karma Sannyasa Yoga
ज्ञान द्वारा अज्ञान का नाश करो।

Chapter wise Bhagavad Gita Teachings & Quotes
सूर्यप्रभा ज्ञान आत्मा को प्रकाशित करता है।

The Bhagavad Gita – Quotes of Chapter 5 – Karma Sannyasa Yoga
संशय रहित साधक परम गति पाता है।

Wisdom Quotes from Bhagavad Gita Chapter 5 – Karma Sannyasa Yoga
भगवान सभी लोकों के स्वामी है।

Bhagavad gita quotes with chapters in hindi
सभी प्राणियों का सुहृद् भगवान ही है।

Best quotes in hindi from Bhagavad Gita Chapter 5 – Karma Sannyasa Yoga
कर्मयोगी शीघ्र ब्रह्म प्राप्त करता है।

Bhagavad Gita Karma Sannyasa Yoga Quotes
आसक्ति रहित कर्म सच्चा संन्यास है।

bhagavad gita quotes chapter wise
योगी सभी में आत्मा ही देखता है।

Bhagwat Geeta Learnings Chapter Wise In Hindi
विषयों से विरक्त होकर शुद्ध रहो।

भगवत गीता श्लोक हिंदी – कर्म संन्यास योग Karma Sannyasa Yoga
जरुर पढ़े >>
- श्री शिव रूद्राष्टकम
- भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम
- हनुमान जी के 108 नाम
- जोशीले Quotes – आज का सुविचार
- अपने सुबह को को अच्छा बनाएं शुभ प्रभात सुविचार के साथ
श्रीमद् भगवद्गीता षष्ठम् अध्याय – ध्यान योग (या आत्म संयम योग)
श्रीमद् भगवद्गीता के छठे अध्याय में श्रीकृष्ण ध्यानयोग का विस्तार से वर्णन करते हैं। निष्काम कर्म करने वाला ही सच्चा संन्यासी और योगी है। योगी को शांतचित्त होकर एकांत स्थान में आसन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास करना चाहिए। इन्द्रिय-मन पर विजय पाने वाला ही सच्चा आत्मसंयमी है। योगी सब प्राणियों में समान दृष्टि रखता है।
ध्यानयोग से इन्द्रिय-निग्रह आवश्यक है। योगी स्वयं पर विजय पाकर समदृष्टि रखता है। आत्मसंयम ही परम धर्म है। सब प्राणियों में समान भाव रखो। योगी सर्वोत्तम है।
सिद्ध योगी सुख-दुख, मान-अपमान में समान रहता है। योग भ्रष्ट व्यक्ति भी श्रेष्ठ गति पाता है। मन चंचल है, पर अभ्यास और वैराग्य से वश में होता है। परमयोगी भगवान में लीन होकर परम शांति प्राप्त करता है। योगी सबसे श्रेष्ठ तत्वदर्शी है।
Quotes from Bhagavad Gita Chapter 6 –Dhyāna Yoga
कर्म फल रहित कर्तव्य करने वाला सच्चा संन्यासी।

bhagavad gita quotes chapter wise
कर्म त्यागने वाला न संन्यासी न योगी।

Bhagwat Geeta Learnings Chapter Wise In Hindi
संन्यासी और योगी एक ही हैं।

भगवत गीता श्लोक हिंदी – आत्म संयम योग Aatm Sanyam Yoga
आत्मा को ऊपर उठाने वाला उसका बंधु।

भागवत गीता अध्याय 6 ध्यान योग
आत्मा को गिराने वाला उसका शत्रु।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 6 ध्यान योग कोट्स
जितेंद्रिय मन वाला आत्मा उसका मित्र।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 6 आत्म संयम योग उद्धरण
अजित मन वाला आत्मा उसका शत्रु।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 6 आत्म संयम योग के उद्धरण
मन संयम कर ईश्वर का ध्यान करो।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 6 ध्यान योग के कोट्स
जीवात्मा में ही परमात्मा समाहित हैं।

भागवत गीता अध्याय 6 आत्म संयम योग उद्धरण
सुख-दुःख, मान-अपमान – दोनों समान।

भागवत गीता अध्याय 6 ध्यान योग कोट्स
योगी सबसे उत्तम भक्त।

श्रीमद् भगवद्गीता षष्ठम् अध्याय – ध्यान योग (या आत्म संयम योग)
योगभ्रष्ट को श्रेष्ठ गति प्राप्त होता है ।

श्रीमद् भगवद्गीता षष्ठम् अध्याय – ध्यान योग
पुण्यकर्मी को उत्तम जन्म मिलता है।

श्रीमद् भगवद्गीता षष्ठम् अध्याय – आत्म संयम योग
तपस्वी कुल में पुनर्जन्म पुण्य कर्म करने वालों को ही मिलता है।

Quotes from Bhagavad Gita Chapter 6 –Dhyāna Yoga
प्रयत्न से ही योग सिद्धि मिलेगी।

Quotes from Bhagavad Gita Chapter 6 –Dhyāna Yog
योगी परम पद प्राप्त करता है ।

Quotes from Bhagavad Gita Chapter 6 –Aatm Sanyam Yoga
बंधु-मित्र भाव से आत्मा संभालो।

Quotes from Bhagavad Gita Chapter 6 –Aatm Sanyam Yog
शत्रु भाव से आत्मा न दुखी करो।

Chapter wise Bhagavad Gita Teachings & Quotes
एकाग्रचित्त होकर आसन साधो।

The Bhagavad Gita – Quotes of Chapter 6 – Dhyāna Yoga
शरीर अचल और स्थिर रखो।

Wisdom Quotes from Bhagavad Gita Chapter 6 – Dhyāna Yoga
शांत मन वाला सदा सुखी।

Bhagavad gita quotes with chapters in hindi
योगी भगवान को सर्वोत्तम मानता।

Best quotes in hindi from Bhagavad Gita Chapter 6 – Dhyāna Yoga
मन चंचल है, अभ्यास से वश।

Best quotes in hindi from Bhagavad Gita Chapter 6 – Dhyāna Yog
वैराग्य से मन स्थिर होता।

Bhagavad Gita Aatm Sanyam Yoga Quotes
योगी सब प्राणियों का कल्याण चाहता।

Bhagavad Gita Aatm Sanyam Yog Quotes
