Bhagavad Gita Chapters wise Quotes in Hindi
| Bhagavad Gita Chapters | ||
| 1. अर्जुन विषाद योग | 2. सांख्य योग | 3. कर्म योग |
| 4. ज्ञान कर्म संन्यास योग | 5. कर्म संन्यास योग | 6. ध्यान योग |
| 7. ज्ञान विज्ञान योग | 8. अक्षर ब्रह्म योग | 9. राजविद्या राजगुह्य योग |
| 10. विभूति योग | 11. विश्वरूप दर्शिन योग | 12. भक्ति योग |
| 13. क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग | 14. गुणत्रय विभाग योग | 15. पुरुषोत्तम योग |
| 16. दैवासुर सम्पद विभाग योग | 17. श्रद्धात्रय विभाग योग | 18. मोक्ष संन्यास योग |
श्रीमद् भगवद्गीता तृतीय अध्याय – कर्म योग
श्रीमद् भगवद्गीता के तीसरे अध्याय में श्रीकृष्ण कर्म का महत्त्व समझाते हैं। कर्म का त्याग संभव नहीं, क्योंकि प्रकृति के बंधन से सभी बंधे हैं। निष्काम भाव से कर्म करना ही सच्चा संन्यास है। धर्म के लिए युद्ध जैसे कठिन कर्तव्य से विमुख न होना चाहिए। स्वार्थरहित कर्म ही मन को शुद्ध करता है।
निष्काम कर्म करो, फल की आसक्ति त्यागो। कर्म न करने से ही बंधन बढ़ता है। धर्मयुद्ध अनिवार्य कर्तव्य है। प्रकृति के बंधन से कर्म ही मुक्ति दिलाता है। स्वार्थरहित कर्म श्रेष्ठ है।
लोकसंग्रह के लिए श्रेष्ठ पुरुष निरंतर कर्म करते हैं। यज्ञ भाव से किया गया कर्म बंधन का कारण नहीं बनता। कामना रहित कर्म ही सच्चा ज्ञान की ओर ले जाता है। देवताओं को प्रसन्न करने हेतु भी यज्ञ कर्म आवश्यक है। निष्काम कर्मयोग से ही परम शांति प्राप्त होती है।
Quotes from Bhagavad Gita Chapter 3 – Karma Yoga
कर्म करना ही जीवन है, अकर्म से तो शरीर भी नहीं चलता।

श्रीमद् भगवद्गीता तृतीय अध्याय – कर्म योग
निष्काम कर्म ही सच्चा संन्यास है।

Chapter wise Bhagavad Gita Teachings & Quotes
प्रकृति के गुण सभी को कर्म कराते हैं।

The Bhagavad Gita – Quotes of Chapter 3 – Karma Yoga
इन्द्रिय वश में कर कर्मयोगी बन।

Wisdom Quotes from Bhagavad Gita Chapter 3 – Karma Yoga
यज्ञ भाव से कर्म करो, बंधन में नही बंधोगे।

Bhagavad gita quotes with chapters in hindi
श्रेष्ठ पुरुष लोकसंग्रह के लिए कर्म करते हैं।

Best quotes in hindi from Bhagavad Gita chapter 3 – Karma Yoga
भगवान भी कर्तव्य से कर्म करते हैं।

Quotes from Bhagavad Gita in Hindi
अज्ञानी को भी कर्मयोग सिखाओ।

Bhagavad Gita Karma Yoga Quotes
अहंकार से मत सोचो ‘मैं करता हूँ’।

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इन्द्रिय भोग से मोह उत्पन्न होता है।

Bhagwat Geeta Learnings Chapter Wise In Hindi
निष्काम कर्म से मन शुद्ध होता है।

Quotes from Bhagavad Gita Chapter 3 – Karma Yoga
कर्मयोगी ही श्रेष्ठ योगी है।

भगवत गीता श्लोक हिंदी – कर्म योग
यज्ञ से देवता प्रसन्न होते हैं।

Shrimad Bhagavad Gita Karma Yoga Quotes
स्वार्थ कर्म बंधन देता है।

भागवत गीता अध्याय 3 कर्म योग
कर्म से ही संसार चलता है।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 3 कर्म योग कोट्स
श्रेष्ठजन कर्म से लोक प्रेरित करते हैं।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 3 कर्म योग उद्धरण
भगवान का अनुकरण कर कर्म करो।

Chapter wise Bhagavad Gita Teachings & Quotes
कर्म न करने से लोक नष्ट हो जाते हैं।

Quotes from Bhagavad Gita Chapter 3 – Karma Yoga
आसक्ति रहित कर्म लोकहितकारी है।

The Bhagavad Gita – Quotes of Chapter 3 – Karma Yoga
प्रकृति कर्म कराती है, अहंकार छोड़ो।

Wisdom Quotes from Bhagavad Gita Chapter 3 – Karma Yoga
गुणों से मोहित होकर कर्म मत करो।

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सभी कर्म भगवान को समर्पित करो।

Bhagavad Gita Quotes from Chapter 3 – Karma Yoga
निर्देशानुसार कर्म करने वाला मुक्त होता है।

Best quotes in hindi from Bhagavad Gita chapter 3 – Karma Yoga
इन्द्रियें मन को हर लेती हैं।

Quotes from Bhagavad Gita Karma Yoga in Hindi
संयम से ही विजय मिलती है।

Bhagavad Gita Karma Yoga Quotes
कर्मयोग से ही ज्ञान प्राप्ति होती है।

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लोक कल्याण के लिए कर्म करो।

Bhagwat Geeta Learnings Chapter Wise In Hindi
कर्म ही जीवन का आधार है, त्याग से नहीं चलता।

भगवत गीता श्लोक हिंदी – कर्म योग
स्वार्थ रहित कर्म ही सच्ची स्वतंत्रता।

Shrimad Bhagavad Gita Karma Yoga Quotes
इन्द्रियों पर विजय पाओ, मन को वश करो।

भागवत गीता अध्याय 3 कर्म योग
अहंकार त्यागकर कर्तव्य निभाओ।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 3 कर्म योग कोट्स
भगवान के निर्देश पर कर्म करो।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 3 कर्म योग उद्धरण
लोक हित के लिए निरंतर कर्म करो।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय कर्म योग उद्धरण
श्रीमद् भगवद्गीता चतुर्थ अध्याय – ज्ञान कर्म संन्यास योग
श्रीमद् भगवद्गीता के चौथे अध्याय में श्रीकृष्ण कर्मयोग के रहस्य को और गहराई से समझाते हैं। यह ज्ञान इस युग में पहली बार दिया जा रहा है, फिर भी अनादि है। अवतार धर्म की रक्षा के लिए होते हैं, भगवान स्वयं प्रकट होते हैं। कर्मयोग से ही सच्चा ज्ञान प्राप्त होता है। पुरुषार्थी ही मुक्ति के अधिकारी बनते हैं।
कर्मयोग से ज्ञान की प्राप्ति होती है। श्रीकृष्ण अवतारों का रहस्य बताते हैं। पुरुषार्थी ही सच्ची मुक्ति पाता है। कर्मफल का ज्ञान आवश्यक है। यज्ञभाव से कर्म करो।
यज्ञ भाव से किया गया कर्म फलदायी होता है। चार वर्ण व्यवस्था गुण और कर्म पर आधारित है। ज्ञानी पुरुष सभी को समान दृष्टि से देखता है। सत्य को जानने वाला भक्त ही भगवान का सच्चा सेवक होता है। निष्काम कर्म से ही परम शांति की प्राप्ति संभव है।
Quotes from Bhagavad Gita Chapter 4 – Gyana Karma Sanyasa Yoga
धर्म रक्षा के लिए भगवान स्वयं अवतार लेते हैं।

Chapter wise Bhagavad Gita Teachings & Quotes
कर्मयोग से ही सच्चा ज्ञान जागृत होता है।

Chapter wise Bhagavad Gita Teachings Quotes
निष्काम कर्म करने वाले ही मुक्ति के हकदार बनते हैं।

The Bhagavad Gita – Quotes of Chapter 4 – Gyana Karma Sanyasa Yoga
चार वर्ण गुण और कर्म से बनते हैं।

Bhagavad Gita – Quotes of Chapter 4 – Gyana Karma Sanyasa Yoga
ज्ञानी मनुष्य सब प्राणियों में समान दृष्टि रखता है।

The Bhagavad Gita – Chapter 4 – Gyana Karma Sanyasa Yoga
सच्चा संन्यासी कर्म का फल त्यागता है।

The Bhagavad Gita – Chapter 4 – Gyana Karma Sanyas Yoga
भक्त जो चाहे, भगवान वही देते हैं।

Wisdom Quotes from Bhagavad Gita Chapter 4 – Gyana Karma Sanyasa Yoga
ज्ञानयज्ञ सबसे श्रेष्ठ यज्ञ है।

Wisdom Quotes from Bhagavad Gita Chapter 4 – Gyana Karma Sanyasa Yog
कर्मसंन्यासी ही सच्चा ज्ञानी होता है।

Wisdom Quotes from BhagavadGita Chapter 4 – Gyana Karma Sanyasa Yoga
अज्ञान के अंधकार को ज्ञान का दीपक जलाकर मिटावों।

भागवत गीता अध्याय 4 ज्ञान कर्म संन्यास योग
निष्काम कर्म ही परम योग है।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 4 ज्ञान कर्म संन्यास योग कोट्स
अवतार सदा धर्म स्थापना के लिए होते हैं।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 4 ज्ञान कर्म संन्यास योग उद्धरण
भगवान की इच्छा ही सर्वोत्तम मार्ग है।

भागवत गीता अध्याय 4 ज्ञान कर्म संन्यास योग उद्धरण
कर्मयोगी संसार का उद्धार करता है।

श्रीमद् भागवतगीता अध्याय 4 ज्ञान कर्म संन्यास योग उद्धरण
सच्चा संन्यास फल त्याग में है।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 4 ज्ञान कर्म संन्यास योग
ज्ञान अग्नि सभी पापों को भस्म कर देता।

श्रीमद् भगवद्गीता चतुर्थ अध्याय – ज्ञान कर्म संन्यास योग
भक्त भगवान का सबसे प्रिय सेवक होता है।

Quotes from Bhagavad Gita Chapter 4 – Gyana Karma Sanyasa Yoga
कर्मयोग से ही मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है।

Quotes in hindi Bhagavad Gita Chapter 4 – Gyana Karma Sanyasa Yoga
भगवान भक्त के अनुसार फल देते हैं।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 4 ज्ञान कर्म संन्यास योग कोट्स
सच्चा संन्यासी कर्म का फल नहीं चाहता।

भागवत गीता अध्याय 4 ज्ञान कर्म संन्यास योग कोट्स
सच्चा ज्ञानी सभी में समदृष्टि रखता है।

श्रीमद् भागवतगीता अध्याय 4 ज्ञान कर्म संन्यास योग कोट्स
अधर्म बढ़ने पर भगवान स्वयं अवतार लेते हैं।

भगवत गीता श्लोक हिंदी – ज्ञान कर्म संन्यास योग
सच्चा कर्मयोगी ज्ञान का स्रोत बनता है।

Bhagavad gita quotes with chapters in hindi
जैसी भक्ति, वैसा ही फल भगवान देते।

Best quotes in hindi from Bhagavad Gita Chapter 4 – Gyana Karma Sanyasa Yoga
विविध यज्ञों से भगवान की प्राप्ति होती।

Bhagavad Gita Gyana Karma Sanyasa Yoga Quotes
अज्ञान तमोगुण से उत्पन्न होता है।

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श्रेष्ठ कर्म से श्रेष्ठ फल मिलता है।

Bhagwat Geeta Learnings Chapter Wise In Hindi
कर्मयोग मार्ग अनादि और अचूक होता है।

भगवत गीता श्लोक हिंदी – ज्ञान कर्म संन्यास योग
कामना रहित कर्म सच्चा यज्ञ है।

Shrimad Bhagavad Gita Gyana Karma Sanyasa Yoga Quotes
भगवान भक्त के हृदय में विराजमान रहतें हैं।

भागवत गीता अध्याय 4 ज्ञान कर्म संन्यास योग
निषिद्ध कर्म से सदैव दूरी रखना चाहिए।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 4 ज्ञान कर्म संन्यास योग कोट्स
भगवान धर्म के प्रहरी होते हैं।

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 4 ज्ञान कर्म संन्यास योग उद्धरण
सच्चा ज्ञानी सबका कल्याण चाहता है।

The Bhagavad Gita – Quotes of Chapter 4 – Gyana Karma Sanyasa Yoga
