ज्ञानी जैल सिंह भारत के सातवें राष्ट्रपति थे। 25 जुलाई 1982 को ज्ञानी जैल सिंह देश के राष्ट्रपति बने।
ज्ञानी जैल सिंह की जीवनी
ज्ञानी जैल सिंह, नीलम संजीवा रेड्डी के बाद भारत के सातवें राष्ट्रपति बने। ज्ञानी जैल सिंह एक बहुत ही शांत और गंभीर स्वभाव के व्यक्ति थे। वह एक लोकप्रिय और सम्मानित नेता थे और उनके बारे में ये प्रसिद्ध है है की वो अपने कार्य के प्रति बेहद प्रतिबद्ध थे। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने कई गंभीर और मुश्किलों वाले हालात मे देश को संभाला जिनमे जिसमें ऑपरेशन ब्लू स्टार, इंदिरा गांधी की हत्या और 1984 के सिख-विरोधी दंगे इत्यादि प्रमुख थे। आईए और विस्तार से जानते है।
पूरा नाम | ज्ञानी जैल सिंह |
Full Name in English | Giani Zail Singh |
जन्म तिथि | 5 मई 1916 |
जन्म स्थान | गांव संधवान, पंजाब |
पिता का नाम | श्री किशन सिंह |
माता का नाम | ईंद कौर |
पत्नी का नाम | प्रधान कौर |
कार्य / व्यवसाय | राजनीतिज्ञ |
नागरिकता | भारतीय |
राजनीतिक दल | कांग्रेस |
पद | भारत के 7वें राष्ट्रपति |
मृत्यु तिथि | 25 दिसम्बर 1994 |
Giani Zail Singh का जन्म
जैल सिंह का जन्म पंजाब के एक गांव संधवान में 5 मई 1916 हुआ था। उनके पिता का नाम श्री किशन सिंह और माता का नाम ईंद कौर था। ज्ञानी जैल सिंह के बचपन का एक नाम जरनैल सिंह भी कहा जाता है।
ज्ञानी जैल सिंह की शिक्षा
ज्ञानी जी बचपन से ही होनहार, प्रतिभाशाली व गुणी थे। हालांकि स्कूल के दिनों मे उनका पढ़ाई के प्रति लगाव नहीं थे अपितु उनका आकर्षण धार्मिक ग्रंथों के ज्ञान, भजन-कीर्तन तथा हॉर्मोनियम सीखने इत्यादि के प्रति ज्यादा था। उनको उर्दू सीखने की ललक भी अत्यधिक थी और उन्होंने उर्दू भाषा का ज्ञान भी अर्जित किया।
बचपन की पढ़ाई ढंग से ना करने के बाबजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई अमृतसर के शहिद सिख मिशनरी कॉलेज से पूरा किया। कॉलेज के सभी कार्यकर्मों मे वो बढचढ कर भाग लेते थे। अपने प्रभावशाली वक्तव्य कौशल के कारण अपने श्रोताओं को वो बाँध के रखते थे।
Giani Zail Singh हिन्दी, पंजाबी और उर्दू में बहुत धाराप्रवाह बोलते थे। वो अपने कॉलज मे इतने लोकप्रिय थे, की लोग उनको “ज्ञानी” कह कर संबोधित करते थे। ज्ञानी जैल सिंह को धार्मिक अध्ययनों में भी अत्यधिक रुचि रहती थी और लोग उनके गुरु ग्रंथ साहिब के ज्ञान के कायल थे।
ज्ञानी जैल सिंह का राजनीतिक जीवन
जैल सिंह मे बचपन से ही राष्ट्रप्रेम की भावना से ओतप्रेत थे। जब वे केवल 15 वर्ष के थे, तभी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को अंग्रेजों ने राष्ट्रवादी गतिविधियों के लिए फांसी की सजा दे दी थी। जैल सिंह पर उस घटना का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा थे।

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उसके बाद 1930 मे ज्ञानी जी सक्रिय रूप से राजनीति में शामिल हो गए और शिरोमणि अकाली दल में आधिकारिक रूप से जूड़ गए। 1938 में जैल सिंह जी ने प्रजा मंडल नामक संस्था की स्थापना की, जो कि फरीदकोट में कांग्रेस पार्टी के साथ संबंधित एक राजनीतिक संगठन थी। हालांकि फिर फरीदकोट के महाराजा ने उनको अपने सत्ता के लिए खतरा मानते हुए गिरफ्तार करवा दिया और पांच साल के लिए उन्हें एकान्त कारावास में रखा गया था और उनको यातनाएं भी दी गई। फिर भी ज्ञानी जी अपने आदर्शों पर कायम रहे।
जेल से निकालकर Giani Zail Singh, स्वतंत्रता आन्दोलनों में देश को स्वतंत्र कराने के लिए और अंग्रेजों को देश से बाहर निकालने के लिए विभिन्न आंदोलनों मे बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते रहें।
1946 में फरीदकोट जिले में उनकी मुलाकात पंडित जवाहर लाल नेहरू से हुई और नेहरू जी ने उनको काँग्रेस पार्टी से आधिकारिक रूप से जोड़ लिया।
देश की आजादी के बाद उन्होंने केंद्र मे कई सारे महत्वपूर्ण पदों को संभाला। 1951 में उन्हें कृषि मंत्री बनाया गया। 1956 से 1958 तक जैल सिंह राज्यसभा के सदस्य रहें।
1972 को जैल सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री का पद सम्भाला। पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में जैल सिंह जी ने 1973 में 640 किमी लम्बे गुरू गोविंद सिंह मार्ग की स्थापना करवाया। और 1974 में स्वामी रामतीर्थ की स्थापना कारवाई।

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इसके बाद 25 जुलाई 1982 को ज्ञानी जैल सिंह देश के राष्ट्रपति बने। उन्होंने भारत के सातवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। उनका कार्यकाल 25 जुलाई 1982 से 25 जुलाई 1987 तक रहा। उनके कार्यकाल मे ही कई सारी दूरभाग्यपूर्ण घटनाएं जैसे की सिख दंगे, ऑपरेशन ब्लू स्टार और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हुई। परंतु इसके बाबजूद ज्ञानी जी ने अपने राष्ट्रपति – काल मे देश को संभाले रखा और अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूर्ण किया।
ज्ञानी जी का निधन
29 नवम्बर 1994 को आनंद साहिब में मत्था टेककर वापस आते समय चण्डीगड़ के निकट एक सड़क दुर्घटना में ज्ञानी जी गंभीर रूप से घायल हो गए। चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल में 26 दिनों तक संघर्ष के पश्चात 25 दिसम्बर 1994 को ज्ञानी जैल सिंह जी राष्ट्र से विदा हो गए।
संक्षेप में
ज्ञानी जैल सिंह भारत देश के सातवें राष्ट्रपति थे। उनका जन्म 5 मई 1916 को पंजाब के फरीदकोट जिले मे हुआ था। पिता भाई किशन सिंह तथा माता का नाम इंद कौर था। उनकी माता का निधन बचपन मे हो जाने के बाद ज्ञानी जी का लालन-पालन उनकी मौसी ने किया। बचपन से ही होनहार, प्रतिभाशाली व गुणी ज्ञानी जी ने स्वतंत्रता आंदोलनों मे बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और आगे जाकर काँग्रेस पार्टी के सदस्य बने।
फिर उन्होंने केन्द्र मे विभिन्य पदों को संभाल और 1972 मे पंजाब के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 25 जुलाई 1982 को ज्ञानी जैल सिंह देश के राष्ट्रपति बने। और उन्होंने अपना कार्यकाल कई सारी विपरीत परिस्थतियों के बाबजूद पूर्ण किया। एक सड़क दुर्घटना मे घायल होने के बाद 25 दिसम्बर 1994 को उनका निधन हो गया।
प्रश्न – उत्तर
ज्ञानी जैल सिंह कौन थे ?
ज्ञानी जैल सिंह का जन्म कब हुआ था ?
ज्ञानी जैल सिंह के माता पिता का क्या नाम था ?
ज्ञानी जैल सिंह ने क्या पढ़ाई की थी ?
उन्होंने उर्दू भाषा का ज्ञान भी अर्जित किया। बचपन की पढ़ाई ढंग से ना करने के बाबजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई अमृतसर के शहिद सिख मिशनरी कॉलेज से पूरा किया। कॉलेज के सभी कार्यकर्मों मे वो बढचढ कर भाग लेते थे। अपने प्रभावशाली वक्तव्य कौशल के कारण अपने श्रोताओं को वो बाँध के रखते थे।
Giani Zail Singh हिन्दी, पंजाबी और उर्दू में बहुत धाराप्रवाह बोलते थे। ज्ञानी जैल सिंह को धार्मिक अध्ययनों में भी अत्यधिक रुचि रहती थी और लोग उनके गुरु ग्रंथ साहिब के ज्ञान के कायल थे।