शंकर दयाल शर्मा (Shankar Dayal Sharma) भारत के नवमें राष्ट्रपति थे। उन्होंने वर्ष 1992 में भारतीय सर्वोच्च राष्ट्रपति पद का कार्यभार ग्रहण किया था।

शंकर दयाल शर्मा एक बहुत ही शांत और गंभीर स्वभाव के व्यक्ति थे।  वह एक कुशल राजनेता थे और उनके बारे में ये प्रसिद्ध है है की वो अपने कार्य के प्रति बेहद प्रतिबद्ध थे। उनका मानना था की हमें अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी से करना चाहिए। वो भारतीय संविधान का बहुत आदर करते थे और संसद के नियमों का पूरी तरह से पालन करते थे और अन्य लोगों को भी नियमों से चलने के लिए प्रेरित करते थे।

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शंकर दयाल शर्मा की जीवनी 

पूरा नामडॉ शंकरदयाल शर्मा
Full Name in EnglishDr. Shankar Dayal Sharma
जन्म तिथि 19 अगस्त, 1918
जन्म स्थानभोपाल
पिता का नामपण्डित खुशीलाल शर्मा
माता का नामसुभद्रा देवी
पत्नी का नामश्रीमती विमला शर्मा
कार्य / व्यवसायराजनीतिज्ञ
नागरिकताभारतीय
 राजनीतिक दलकांग्रेस
पदभारत के 9वें राष्ट्रपति
मृत्यु तिथि26 दिसंबर,1999

डॉ शंकरदयाल शर्मा भारत के अति सम्मानित राजनेता, आदर्श शिक्षक, स्वाधीनता कर्मी, और भारतवर्ष के नौवें राष्ट्रपति थे। राष्ट्रपति पद पर चयनित होने से पहले, उन्होंने पाँच वर्षों के लिए भारत के उपराष्ट्रपति पद को भी सुशोभित किया।

अपने प्रारम्भिक स्कूली शिक्षा और कॉलेज के बाद उन्होंने कानूनी शिक्षा ग्रहण किया और उसके बाद वह लखनऊ विश्वविद्यालय तथा कैंब्रिज विश्वविद्यालय में कानून के अध्यापक के रूप में कार्यरत रहें। कम उम्र में ही भारतीय स्वतंत्रता आंदोलनों में भी प्रमुखता से सम्मिलित होने लगे थे। उन्होंने ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में भी भाग लिया।

विभिन्न आंदोलनों के दौरान श्री शर्मा काँग्रेस पार्टी से संपर्क मे आयें और पार्टी के सक्रिय सदस्य के बन कर पार्टी की नीतियों का प्रचार प्रसार करने लगें। स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1952 में डॉ शर्मा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने और फिर केंद्र की राजनीति में आते हुए वर्ष 1971 में भोपाल से लोकसभा के लिए चुने गए।

वर्ष 1974 से लेकर वर्ष 1977 तक डॉ शंकरदयाल शर्मा ने श्रीमती इंदिरा गाँधी के केंद्र की सरकार में संचार मंत्री का पद संभाला।शंकरदयाल शर्माआंध्रप्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र के राज्यपाल के पद पर भी नियुक्त किए गए।

वर्ष 1987 में श्रीमान शर्मा उपराष्ट्रपति पद तथा वर्ष 1992 में राष्ट्रपति पद पर सुशोभित हुए।

शंकर दयाल शर्मा का जन्म

Shankar Dayal Sharma का जन्म वर्ष 1918 मे दिनांक 19 अगस्त को के भोपाल (भोपाल उस समय भोपाल रियासत था, जो बाद मे मध्यप्रदेश मे विलय के बाद मध्यप्रदेश का राजधानी बनी) में हुआ था। इनके पिता जी पण्डित खुशीलाल शर्मा भोपाल शहर के एक प्रख्यात वैध थे। इनकी माता जी सुभद्रा देवी एक गृहणी थीं।

Shankar Dayal Sharma की शिक्षा

शंकरदयाल शर्मा जी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा भोपाल में स्थित दिगम्बर जैन स्कूल से प्राप्त किया था। फिर उन्होंने आगरा के सेंट जोंस कॉलेज और उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वहाँ से उन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य और संस्कृत तथा हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि ग्रहण किया। उसके बाद श्री शर्मा ने लखनऊ विश्वविद्यालय से वकालत की पढ़ाई की और एल एल.बी. की उपाधि प्राप्त की।

श्री शर्मा उसके बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए इंग्लैण्ड गए। वहाँ उन्होंने कानून में पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। फिर लंदन विश्वविद्यालय से उन्होंने लोक प्रशासन में डिप्लोमा (Diploma in Public Administration) की उपाधि प्राप्त की।

शंकर दयाल शर्मा ने इतनी शिक्षा ग्रहण करने के बाद अपने ज्ञान को बांटने का निर्णय लिए और अध्यापन का पेशा अपनाने का निर्णय लिया। उन्होंने कुछ सालों तक लखनऊ विश्वविद्यालय तथा कैंब्रिज विश्वविद्यालय मे कानून के अध्यापक के रूप में कार्य किया। इस दौरान कुछ ही दिनों में वो छात्रों के सबसे पसंदीदा शिक्षक के रूप मे जाने जाने लगे।

कानून के साथ साथ श्री शर्मा को खेलकुद और साहित्य में भी गहन रुचि थी।

डॉ शंकर दयाल शर्मा का पारिवारिक जीवन

वर्ष 1950 में दिनांक 7 मई को जयपुर में श्री शंकरदयाल शर्मा जी का विवाह श्रीमती विमला शर्मा जी के साथ हुआ। विवाह उपरांत उनको दो पुत्र एवं दो पुत्रियां हुई ।

श्रीमती विमला शर्मा जी की भी सामाजिक सेवा कार्यों में गहन रुचि थी और परिवार का ध्यान रखने के साथ साथ वो समाज मे सेवा कार्य भी करती रहती थी। वर्ष 1985 में श्रीमती शर्मा उदयपुरा क्षेत्र (रायसेन) से मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए विधायिका निर्वाचित हुईं। इस सीट से बनने वाली वह प्रथम महिला विधायिका थीं।

शंकर दयाल शर्मा का राजनैतिक जीवन

अपने प्रारम्भिक काल से ही श्री शर्मा के दिलों दिमाग मे देश प्रेम था। फिर जब वो एक शिक्षक के रूप मे कार्य कर रहें थे तो उस समय की अपने देश को परिस्थियों का उनपर काफ़ी प्रभाव पड़ा। उन्होंने वर्ष 1940 मे काँग्रेस पार्टी की सदस्यता ली। फिर जब वर्ष 1942 में महात्मा गांधी के द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान हुआ तो अन्य देश प्रेमियों की तरह ही शंकरदयाल शर्मा ने भी उस आंदोलन मे बढचढ़ कर हिस्सा लिया। इसके फलस्वरूप उन्हे अदालत द्वारा कैद की सज़ा भी सुनाई गई थी।

इसके बाद वर्ष 1948 में भोपाल रियासत का भारत गणराज्य में विलय के आन्दोलन में भी श्री शर्मा जी ने बढचढ़ कर हिस्सा और उसके लिए जेल की सजाएं भी काटी।

उन्ही आन्दोलनों के दौरान शंकरदयाल शर्मा का काँग्रेस से गहरा लगाव होने लगा और फिर धीरे धीरे वो पार्टी के सक्रिय सदस्य बन गए। उसके बाद वह पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगे। उसके बाद वर्ष 1950 से लेकर वर्ष 1952 तक वह भोपाल कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने। उसी वर्ष 1952 मे उन्होंने भोपाल के पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और वर्ष 1956 तक मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। फिर वर्ष 1956 से लेकर वर्ष 1971 तक डॉ शंकरदयाल शर्मा मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य के रूप में कार्यरत रहें।

वर्ष 1967 में श्री शर्मा ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी तथा कांग्रेस कार्य समिति की सदस्यता ग्रहण किया। और फिर वर्ष 1967 से लेकर वर्ष 1968 तक उन्होंने मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्षता की। वर्ष 1968 से लेकर वर्ष 1972 तक वह कांग्रेस के महासचिव (General Secretary) के पद पर रहें और वर्ष 1972 से लेकर वर्ष 1974 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष का पद ग्रहण किया।

राज्य में उनके काँग्रेस पार्टी में योगदान और देश सेवा के लिए उनके कार्य को देखते हुए वर्ष 1971 मे उनको काँग्रेस ने केंद्र की राजनीति में लाने का फैसला किया और भोपाल से लोकसभा का उमीदवार बनाया और उस चुनाव में भारी मतों से विजय होकर डॉ शर्मा लोकसभा के लिए चुने गए। वर्ष 1974 से लेकर वर्ष 1977 तक डॉ शंकरदयाल शर्मा, श्रीमती इंदिरा गाँधी की सरकार में संचार मंत्री बने। वर्ष 1980 मे डॉ शर्मा ने फिर भोपाल से लोकसभा का चुनाव लड़ा और विजय होकर दूसरी बार संसद पहुंचे।

वर्ष 1984 में डॉ शंकरदयाल शर्मा को आंध्रप्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया। फिर वर्ष 1985 मे उन्हे पंजाब का राज्यपाल बनाया गया। उसके तुरंत बाद ही वर्ष 1986 में उनका पंजाब से बदलकर महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया।

वर्ष 1987 में श्रीमान शंकरदयाल शर्मा जी का चुनाव उपराष्ट्रपति पद पर हुआ। वर्ष 1987 में 3 सितंबर को पद की शपथ लेने के बाद उस पद पर उन्होंने 5 वर्षों के लिए वर्ष 1992 तक अपनी सेवाएं दीं।

राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा

वर्ष 1992 में श्री रामास्वामी वेंकटरमण के कार्यकाल के पश्चात शंकरदयाल शर्मा भारत के राष्ट्रपति पद पर सुशोभित हुए। वह वर्ष 1992 में 25 जुलाई को शपथ ग्रहण के बाद पाँच वर्षों के लिए वर्ष 1997 तक राष्ट्रपति पद पर बने रहे।

श्रीमान शंकरदयाल शर्मा को प्राप्त सम्मान और पुरस्कार

डॉ शंकरदयाल शर्मा को अनगिनत पुरस्कारों और सम्मानो से नवाजा गया। जिनमे से प्रमुख है श्रृंगेरी के शंकराचार्य द्वारा दिया गया राष्ट्र रत्नम की उपाधि तथा कानूनी पेशे में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हे इंटरनेशनल बार एसोसिएशन द्वारा दिया गया द लिविंग लीजेंड्स ऑफ लॉ पुरस्कार।

डॉ शंकर दयाल शर्मा का निधन

उम्र के आखिरी पड़ाव में डॉ शंकरदयाल शर्मा का स्वास्थ्य गिरने लगा था और वो कई बीमारी से ग्रसित होने लगे थे। वर्ष 1999 में 26 दिसंबर को 81 वर्ष की आयु में, दिल का दौरा पड़ने के कारण डॉ शर्मा का निधन हो गया।

एक आदर्श व्यक्ति, देश प्रेमी, कार्तव्यनिष्ट, एक आदर्श शिक्षक और अनेक जिम्मेदारियों को कुशल ढंग से संभालते हुए देश की सेवा के लिए उनको सदैव सम्मानपूर्वक याद किया जाता है। हम उनके द्वारा स्थापित आदर्श के लिए उनको दिल से नमन करते है।