कोच्चेरील रामन नारायणन भारतवर्ष के दसवें राष्ट्रपति थे। श्रीमान का व्यक्तित्व “सादा जीवन उच्च विचार” वाली कहावत को चरितार्थ करता था। साधारण परिवार में जन्मे श्री नारायणन समाज के धरातल से जुड़े व्यक्ति थे, इसके बाद भी उन्होंने भारतीय राजनीति के शीर्ष पद को सुशोभित किया। यह भारत के लोकतंत्र की महानता को दर्शाता है।
कोच्चेरील रामन नारायणन की जीवनी
पूरा नाम | कोच्चेरील रामन नारायणन |
Full Name in English | Kocheril Raman Narayanan |
जन्म तिथि | 27 अक्टूबर, 1920 |
जन्म स्थान | पेरुमथॉनम उझावूर ग्राम, त्रावणकोर (वर्तमान -केरल) |
पिता का नाम | कोच्चेरिल रामन वेद्यार |
माता का नाम | पुत्राथठुरावीथी पप्पियाम्मा |
पत्नी का नाम | उषा नारायणन (‘मा टिंट टिंट’ – विवाह पूर्व उनका नाम ) |
कार्य / व्यवसाय | राजनीतिज्ञ |
नागरिकता | भारतीय |
राजनीतिक दल | कांग्रेस |
पद | भारत के 10वें राष्ट्रपति |
मृत्यु तिथि | 9 नवम्बर, 2005 , नई दिल्ली |
कोच्चेरील रामन नारायणन का जन्म
K. R. Narayanan का पूरा नाम कोच्चेरील रामन नारायणन हैं। श्री के. आर. नारायणन का जन्म वर्ष 1920 में 27 अक्टूबर को हुआ था | इनका जन्म इनके पैतृक घर पेरुमथॉनम उझावूर ग्राम, त्रावणकोर में हुआ था। यह स्थान अब वर्तमान में केरल के कोट्टायम ज़िला में स्थित है।
के. आर. नारायणन के पिता का नाम श्री कोच्चेरिल रामन वेद्यार और माता का नाम श्रीमती पुत्राथठुरावीथी पप्पियाम्मा था। इनके पिता भारतीय पद्धति के कुशल आयुर्वेदाचार्य थे और इनकी माता गृहणी थी। श्री नारायणन अपने भाई- बहनों मे चौथे नंबर पर थे।
के. आर. नारायणन की शिक्षा
श्री नारायणन की आरम्भिक शिक्षा उझावूर के अवर प्राथमिक विद्यालय तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय उझावूर में हुई। उसके बाद नारायणन ने सेंट मेरी हाई स्कूल से वर्ष 1937 में अपनी मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने के कारण श्री नारायणन को छात्रवृत्ति का सहारा लेकर आगे की पढ़ाई करनी पड़ी। उन्होंने अपना इंटरमीडिएट परीक्षा वर्ष 1940 में जिला कोट्टायम के सी. एम. एस. स्कूल से उत्तीर्ण की। इसके बाद इन्होंने कला में स्नातक स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की। फिर अंग्रेज़ी साहित्य में त्रावणकोर विश्वविद्यालय (वर्तमान में केरल विश्वविद्यालय) से वर्ष 1943 में स्नातकोत्तर परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।
वर्ष 1944 में श्री नारायणन ने पत्रकार का कार्य करना आरंभ किया और ‘द हिन्दू’ और ‘द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया’ में कार्य किया। इसके बाद श्री नारायणन वर्ष 1945 में इंग्लैण्ड जाकर ‘लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनामिक्स’ में राजनीति विज्ञान का अध्ययन शुरू किया और फिर बी. एस. सी. इकोनामिक्स (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की।
के. आर. नारायणन का पारिवारिक जीवन
के. आर. नारायणन जब भारतीय विदेश सेवा में भारतीय राजनयिक के रूप मे म्यांमार में कार्यरत थे तो उनकी मुलाकात और मित्रता सुश्री “मा टिंट टिंट” से हुई और फिर जल्द ही यह दोस्ती प्रेम में परिवर्तित हो गई। फिर उन दोनों ने विवाह कर लिया।
विवाह के पश्चात सुश्री “मा टिंट टिंट” ने भारतीय नागरिकता प्राप्त की और अपना नाम बदलकर “उषा नारायणन” रखा। श्रीमती उषा नारायणन ने भी भारतीय महिलाओं और बच्चों के उत्थान के लिए कई सारे सामाजिक सेवा के कार्य किए। श्री नारायणन की दो पुत्रियाँ हुई जिनके नाम है सुश्री चित्रा और सुश्री अमृता।
श्री नारायणन का राजनीतिक सफ़र
वर्ष 1949 में नारायणन, भारतीय विदेश सेवा में नियुक्त हुए। फिर भारतीय राजनयिक के रूप में श्रीमान रंगून, टोकियो, लंदन, कैनसास और हेनोई आदि दूतावास में रहे। फिर वर्ष 1967 में वह थाइलैण्ड, वर्ष 1973 में तुर्की तथा वर्ष 1976 में चीन गणराज्य के राजदूत के रूप में नियुक्त किए गए।
उसके बाद वर्ष 1978 में श्रीमान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के उपकुलपति बने। सेवानिवृत्ति होने के वावजूद वर्ष 1980 में श्री नारायणन को श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीय राजदूत बनाकर वाशिंगटन भेजा गया।
श्री नारायणन फिर औपचारिक रूप से कॉंग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण करके केरल के ओट्टापलल सीट से वर्ष 1984, वर्ष 1989 तथा वर्ष 1991 के लगातार तीन लोकसभा चुनावों में विजयी होकर संसद पहुँचे। सांसद बनने के बाद वह राजीव गाँधी सरकार के केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में शामिल किए गए।
श्री. नारायणन का उप-राष्ट्रपति बनना
श्री नारायणन 21 अगस्त, वर्ष 1992 को डॉ. शंकर दयाल शर्मा के राष्ट्रपतित्व काल में सर्वसम्मति से उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए।
श्री. नारायणन का राष्ट्रपति बनना
डॉ. शंकर दयाल शर्मा के राष्ट्रपतित्व काल समाप्त होने के पश्चात 25 जुलाई, वर्ष 1997 को संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश श्री जे. एस. वर्मा ने श्री कोच्चेरील रामन नारायणन को भारत के राष्ट्रपति पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
के .आर.नारायणन द्वारा लिखी गईं पुस्तकें
के. आर. नारायणन ने कई पुस्तकें लिखी जिनमे से प्रमुख है “इमेजेस एण्ड इनसाइट्स”, “नॉन अलाइमेंट इन कन्टैम्परेरी इंटरनेशनल निलेशंस” और “इण्डिया एण्ड अमेरिका एस्सेस इन अंडरस्टैडिंग’, ‘इमेजेस एण्ड इनसाइट्स” इत्यादि।
के .आर.नारायणन को मिला सम्मान
श्री के. आर. नारायणन को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार दिए गए। जिनमे से प्रमुख है सेन कार्लोस विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की गई ‘डॉक्टर ऑफ़ लॉस’ की उपाधि । इसके अलावा इन्हे न्यूयार्क में ‘वर्ल्ड स्टेट्समैन अवार्ड’ दिया गया। फिर ‘टोलेडो विश्वविद्यालय’, अमेरिका ने इन्हें ‘डॉक्टर ऑफ़ साइंस’ की उपाधि प्रदान की। इन्हे ‘आस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय’ द्वारा भी ‘डॉक्टर ऑफ़ लॉस’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
K. R. Narayanan का निधन
9 नवम्बर, 2005 को आर्मी रिसर्च एण्ड रैफरल हॉस्पिटल, नई दिल्ली में गुर्दों के काम न करने के कारण श्री नारायणन का निधन हो गया।
श्री नारायणन को उनके अतुल्य राष्ट्र प्रेम, विशिष्ट व्यक्तित्व, नैतिक मनोबल तथा देश सेवा के लिए सदैव याद किया जाएगा।
FAQ
K. R. Narayanan कौन थे ?
कोच्चेरील रामन नारायणन का जन्म कब हुआ था ?
K. R. Narayanan का जन्म कहाँ हुआ था ?
के. आर. नारायणन ने क्या शिक्षा प्राप्त की थी ?
श्री नारायणन ने अपना इंटरमीडिएट परीक्षा वर्ष 1940 में जिला कोट्टायम के सी. एम. एस. स्कूल से उत्तीर्ण की। इसके बाद इन्होंने कला में स्नातक स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की। फिर अंग्रेज़ी साहित्य में त्रावणकोर विश्वविद्यालय से वर्ष 1943 में स्नातकोत्तर परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।
श्री नारायणन ने 1945 में इंग्लैण्ड जाकर ‘लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनामिक्स’ में राजनीति विज्ञान का अध्ययन शुरू किया और फिर बी. एस. सी. इकोनामिक्स (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की।
K. R. Narayanan की पत्नी कौन थी ?
के. आर. नारायणन क्या काम करते थे ?
1967 में श्री नारायणन थाइलैण्ड, 1973 में तुर्की और 1976 में चीन गणराज्य के राजदूत के रूप में नियुक्त हुए थे।
1978 में श्रीमान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के उपकुलपति बने। सेवानिवृत्ति होने के वावजूद 1980 में उन्हे संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत का राजदूत बनाकर वाशिंगटन भेजा गया।
श्री नारायणन कॉंग्रेस पार्टी की ओर से 1984, 1989 और 1991 में केरल के ओट्टापलल सीट लगातार तीन लोकसभा चुनावों में सांसद नियुक्त हुए थे। सांसद बनकर वह राजीव गाँधी सरकार में केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में थे।
1992 में श्री नारायणन उपराष्ट्रपति और फिर 1997 में भारत के राष्ट्रपति पद पर सुशोभित हुए।