स्वास्थ्य ही दौलत है – हिंदी प्रेरक कहानी

स्वास्थ्य ही दौलत है – हिंदी प्रेरक कहानी 

 

 

दोस्तों आजकल की भागदौर की जिन्दगी में हमलोग दिन रात काम और पैसे के चक्कर में पड़े रहते है | रहना भी चाहिए आखिर आजकल बिना पैसे के क्या मिलता है |

परन्तु फिर भी पैसे के कारण या किसी काम के कारण हमे अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवार नहीं करना चाहिए | क्यूंकि हो सकता है की हम अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर सफलता प्राप्त कर लें और खूब सारा पैसा कमायें | लेकिन ऐसा पैसा लेकर हम क्या करेंगे जिसको हम खर्च ही न कर सकते | क्यूंकि हमे पता ही नहीं चलता पैसा के पीछे पीछे भागते हुए हमने अपने स्वास्थ्य का क्या कर लिया है |

दिन रात काम | पैसा नाम सोहरत पाने के चक्कर में आज लोग कितनी सारी बिमारियों के चंगुल में फंस रहे है | तनाव , मधुमेह , ब्लड प्रेशर आदि इसी चक्कर में ज्यादातर लोगो को होता है | परन्तु असली दौलत जो हमारे पास है हम उसकी कर्द्र करना ही छोर देते है और जब हमे अहसास होता है तब तक हम कई साडी बीमारियों के चक्कर में पड़ चुके होते है | स्वास्थ्य ही दौलत है | ( Motivational Hindi Story ) पढ़ के आपको भी अहसास होगा मेरी तरह की असली दौलत हमारा स्वास्थ्य ही है |

कहानी सिकंदर की है | सिकंदर ने अपनी जिन्दगी में हर कुछ अर्जित किया |  बात तब की है जब सिकंदर अपनी जिंदगी का आखरी साँस  ले रहा था | सिकंदर ने अपने चिकित्सको को अपनी एक इच्छा बताई | सिकंदर ने कहा कि वो अपनी माँ को देख कर मरना चाहता है  | सिकंदर की माँ काफी दूर रहती थी | कम से कम २०-२२ घंटे लगते सिकंदर को उनके पास लाने में या सिकंदर को वहाँ पहुचने में |

लेकिन सिकंदर के पास इतना वक्त नहीं था | चिकित्सको ने मना कर दिया | वो बोले ये संभव नहीं है , उतना वक़्त अब नहीं बचा | सिकंदर ने अपने चिकित्सको से कहा कि मै सब कुछ देने के लिए तैयार हूँ | तुमलोग जो भी चाहो ले सकते हो, लेकिन इतने घंटे मुझे और दिला दो ताकि जिससे मै पैदा हुआ हूं, उससे विदा तो ले लू | चिकित्सको ने कहा यह असंभव है | फिर सिकंदर ने कहा मै तुमलोगो को अपना आधा सम्राज्य दे दुंगा | चिकित्सको को उदास और चुप खड़े देख सिकंदर ने फिर कहा कि तुमलोग मेरा पूरा सम्राज्य ले लो | लेकिन चिकित्सको ने चुपचाप सुना और कुछ भी नहीं कर पायें |

अपने आखिरी समय में सिकंदर यही सोचता रह गया  की काश पहले मुझे ये ख्याल रहता की अपना पूरा सम्राज्य देकर भी मैं एक साँस नहीं खरीद सकता तो अपना पूरा जीवन सिर्फ इस साम्राज्य के लिए ख़राब नहीं करता |

यही कहानी तो सिकंदर के है दोस्तों लेकिन हममे से ज्यादातर लोग भी वेसा ही करते है | यह जीवन वास्तव में कुदरत का एक अमूल्य उपहार है | हमारी एक – एक साँस बहुत ही बहुमूल्य है | हमे इसे व्यर्थ नहीं गवाँना चाहिए |

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