मकर संक्रान्ति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। यह पर्व हर साल 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है। मकरसक्रांति भारत के साथ साथ विश्व के कई देशों मे भी मनाया जाता है।
देश के अधिकांश राज्य मे यह त्योहार किसी न किसी रूप मे मनाया जाता है। बिहार उत्तरप्रदेश आदि राज्यों मे इस दिन को काफी महत्व दिया जाता है और यह त्योहार बहुत ही हरौल्लास के साथ मनाया जाता है। बच्चो के लिए यह त्योहार बहुत ही खास होता है क्योंकि इसदिन उन्हे तिल के लड्डू दिल खोल कर खाने को मिलते है।
मकर संक्रान्ति क्या है?
सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में जाता है तो इसको संक्रांति कहते हैं। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी मकर संक्रान्ति पर्व को मनाया जाता है। हर वर्ष यह त्योहार जनवरी माह 14 या 15 तारीख को ही पड़ता है। सूर्य इस दिन धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है।
मकर संक्रान्ति क्यों मनाया जाता है?
मकर संक्रान्ति से जुड़ी एक एक पौराणिक कथा के अनुसार सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव को पसंद नहीं करते थे और उन्होने शनि देव और उनकी मां छाया को अपने से अलग कर दिया। शनि देव ने इस बात से क्रोधित होकर सूर्य देव को कुष्ठ रोग का श्राप दे दिया।
पिता की स्थिति को देख कर यमराज ने तपस्या की ( वो सूर्य देव की दूसरी पत्नी संज्ञा के पुत्र थे) यमराज की तपस्या से सूर्यदेव का कुष्ठ रोग ठीक हो गया। ठीक होने के बाद सूर्य देव ने क्रोध में आकर शनि देव और उनकी माता का घर ‘कुंभ’ (शनि देव की राशि) जला दिया। इससे दोनों को बहुत कष्ट हुआ।
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यमराज ने यह सब देखकर पिता सूर्य को समझाया। उनकी बात मानकर सूर्य देव शनि से मिलने उनके घर पहुंचे। शनि देव और उनकी माता के घर ‘कुंभ’में आग लगाने के कारण वहां सब कुछ जल गया था, लेकिन काले तिल बच गए थे। शनि देव ने अपने पिता सूर्य देव की पूजा इन्ही तीलों से की। इससे प्रसन्न होकर सूर्य देव ने शनि देव को उनका दूसरा घर ‘मकर’ दिया।
कहा जाता है कि शनि देव को तिल की वजह से ही सूर्य देव का आशीर्वाद मिला तथा घर और सुख की प्राप्ति हुई, तभी से मकर संक्रांति पर भगवान सूर्य देव की पूजा के साथ तिल का बड़ा महत्व माना जाने लगा।
यह भी कहते है की महाभारत काल में पितामह भीष्म ने मकर संक्रान्ति के दिन ही अपने देह का त्याग किया था।
मकर संक्रान्ति कैसे मनाते है!
मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। देश के अधिकांश राज्य मे मकर संक्रान्ति त्योहार किसी न किसी रूप मे मनाया जाता है। बिहार उत्तरप्रदेश आदि राज्यों मे इसे मकर संक्रान्ति के रूप मे मनाते है। तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। हरियाणा और पंजाब में इसे लोहड़ी के रूप में 13 जनवरी को मनाया जाता है। कहीं-कहीं मकर संक्रान्ति को उत्तरायणी भी कहते हैं। विभिन्न राज्यों में इस त्योहार को मनाने के जितने अधिक रूप प्रचलित हैं उतने किसी अन्य त्योहार में नहीं।
उत्तर प्रदेश में इस त्योहार को ‘दान का पर्व’ भी कहते है। यहाँ संक्रान्ति के दिन स्नान के बाद दान देने की भी परम्परा है। इस दिन गंगा स्नान करके तिल के मिष्ठान आदि को ब्राह्मणों व पूज्य व्यक्तियों को दान दिया जाता है। बिहार, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में इस व्रत को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है तथा इस दिन खिचड़ी खाने एवं खिचड़ी दान देने का अत्यधिक महत्व होता है। इस दिन उड़द, चावल, तिल, चिवड़ा, गौ, स्वर्ण, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि दान करने का प्रचलन है।

मकर संक्रान्ति
मकर संक्रान्ति के अवसर पर भारत के विभिन्न राज्यों में पतंग उड़ाने का अपना महत्व है।
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FAQ
मकर संक्रांति त्योहार क्यों मनाया जाता है ?
मकर संक्रांति के पर्व से जुड़े हुए कई मान्यताएं है जिसमे 2 प्रमुख है।
पहला यह है की शनि देव ने अपने नाराज पिता सूर्य देव की पूजा इसी दिन तीलों से की थी। इससे प्रसन्न होकर सूर्य देव ने शनि देव को उनका दूसरा घर ‘मकर’ दिया।
कहा जाता है कि शनि देव को तिल की वजह से ही सूर्य देव का आशीर्वाद मिला तथा घर और सुख की प्राप्ति हुई, तभी से मकर संक्रांति पर भगवान सूर्य देव की पूजा के साथ तिल का बड़ा महत्व माना जाने लगा।
दूसरा लोगों का यह भी कहना है की महाभारत काल में पितामह भीष्म ने मकर संक्रान्ति के दिन ही अपने देह का त्याग किया था।