कैसी ये टिश-टिशी!!!!!!!!!!!!!!!!

आँखे हैं धुआ-धुआ;

दिल भी क्यों भरा-भरा;

आज क्यों,ज़ज्बात यूँ हावीं हैं,

क्यों बेचैनी अजीब सी;

कुछ चुभा तो है, जिसकी है ये टिश-टिशी|

कुछ दिन पहले  की तो बात है;

हम कितने खुशमिजाज थे;

क्या हुआ,कैसे बँधे यूँ मोह-फांश मे;

के जाते ही उनके बेकरार होने लगे;

आना भी उनका, तो ना अजीब था;

साथ भले हाशीन हो;

पर इसका तो इल्म था ही;

फिर क्यों ,जाने से उनके हम गमशीन हो रहे;

ऐसा भी ना था की हम थे किसी गिरफ़्त मे,

ये अलग है,की इक सुकून था उस हबीब मे,

पर समझदार हम,उनपे फ़ना भी तो ना थे,

फिर क्यों,ऐहसास उनका इतने करीब मे;

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