आर्थिक मोर्चे पर भारत बेशक संवृद्धि के झंडे गाड़ रहा हो, लेकिन कुपोषण कई दशकों से यहाँ एक प्रमुख सामाजिक-आर्थिक चुनौती बना हुआ है। हाल ही में, कुपोषण का मुद्दा एक बार पुनः चर्चा में तब आया जब अंग्रेजी पत्रिका ‘दि इकोनॉमिस्ट’ (The Economist) ने यूनिसेफ द्वारा जारी ‘रैपिड सर्वे ऑन चिल्ड्रन’ (RSOC) 2013-14 के