लोहड़ी भारत मे मनाये जाने वाला प्रमुख त्योहार माना जाता है। खासकर लोहड़ी उत्तर भारत के प्रमुख त्योहार मे गिना जाता है।

Lohri

यह त्योहार पंजाब और हरियाणा का मुख्य पर्व है। यह पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार देश के अनेक राज्यों मे अलग नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व मकर संक्रांति की पूर्व संध्या (एक दिन पहले शाम) को मनाया जाता है ।

लोहड़ी क्यों मनाते है?

लोहड़ी का त्योहार पंजाब और हरियाणा मे बहुत ही धूमधाम और हर्सौल्लास के साथ मनाया जाता है। इस पर्व को किसानों के नए वर्ष के रूप मे देखा जाता है। लोहड़ी पंजाब और हरयाणा में फसल कटाई के दौरान मनाया जाता है। फसल काटने से किसानों की आमदनी होती और इससे इनका घर चलता है।

ऐसा माना जाता है की लोहड़ी के त्योहार दुल्ला भट्टी से जुड़ा हुआ है। दुल्ला भट्टी को पंजाबी समुदाय मे एक आदर्श पुरुष (नायक / Hero) के रूप मे देखा जाता है। यहाँ तक की इस त्योहार के ज़्यादातर गानों भी दुल्ला भट्टी से ही जुड़ा हुआ है।

दुल्ला भट्टी को पंजाबी समुदाय मे एक आदर्श पुरुष माना जाता है। दुल्ला भट्टी एक विद्रोही था और भट्टी राजपूत था। उसके पूर्वज पिंडी भट्टियों के शासक थे जो की संदल बार नामक जगह पर था। यह जगह अब पाकिस्तान मे पड़ता है।

यह भी कहते है की लोहड़ी का त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार पौष महीने में आता है इसके बाद से सर्दियां घटनी शुरू हो जाती है और नई फसल का समय शुरू हो जाता है। इसलिए भी नयी फसल की खुशी जाहिर करने के लिए यह पर्व मनाया जाता है।

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लोहड़ी

लोहड़ी कैसे मनाते है?

लोहड़ी का त्योहार लोग आपस मे सम्मलित होकर मनाते है। लोहड़ी के दिन सभी लोग एक जगह आग जलाते है फिर इसके आसपास मिलकर नाचते-गाते हैं। सभी मिलकर गुड़, तिल, रेवड़ी इत्यादि आग में डालते है और फिर प्रसाद रूप मे आपस मे मिल बांटकर खाते है और खुशियाँ मनाते है।

घर मुहल्ले के सभी पुरुष, बच्चे, स्त्रियाँ इस समय नाचते गाते है। घर की महिलाएं भी साथ देते हुए प्रचलित लोकगीत गातीं और खुशियाँ मनाती है। रेवड़ी और गजक मिठाइयाँ आपस मे खाते हुए पूरे हरसोल्लास से यह लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है।