गायत्री मंत्र को विश्व के सबसे दिव्य और शक्तिशाली मंत्रों की श्रेणी मे रखा जाता है। यह अत्यंत ही पवित्र और कल्याणकारी मंत्र माना जाता है। यह एक ऐसा दिव्य मंत्र है जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड और सभी प्राणियों के लिए कल्याणकारक है। ऐसा कहा जाता है की स्वयं देवी – देवता भी इस मंत्र का जाप करते रहते हैं।

 

गायत्री माता

गायत्री माता को वेदों की माता कहा जाता है. माना जाता है कि सभी चारों वेदों का सार इस एक गायत्री मंत्र में समाहित है। गायत्री देवी, पंचमुख़ी माता है जो हमारी पांचों इंद्रियों और प्राणों की देवी मानी जाती है।

गायत्री मंत्र

गायत्री मंत्र में कुल 24 अक्षरों है, माना जाता है के ये 24 अक्षर देवी-देवताओं के स्मरण बीज है। इन्ही 24 अक्षरों को वेदों और शास्त्रों के ज्ञान का आधार भी माना जाता है।

मंत्र को ऋग्वेद से लिया गया है और सभी मंत्रों में इसको सबसे सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त है इसीलिए इसे महामंत्र भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि Gayatri Mantra की रचना महर्षि विश्वामित्र ने की थी। इस मंत्र को “सावित्री मंत्र” या “तारक मंत्र” भी कहते है।

उपनयन संस्कार में भी गायत्री मंत्र एक अभिन्न अंग है

गायत्री मंत्र  Gayatri Mantra

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं, भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्

oṃ bhūr bhuvaḥ svaḥ tat savitur vareṇyaṃ,
bhargo devasya dhīmahi dhiyo yo naḥ prachodayāt

ऋग्वेद Rigveda

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गायत्री मंत्र का अर्थ

यह एक परम दिव्य मंत्र है जो मनुष्य के समस्त दुखों का अंत करने की क्षमता रखती है। Gayatri Mantra के जाप से जो वायु में जो कम्पन होता है उससे मनुष्य का मन और शरीर शुद्ध हो जाता है। मन निर्मल हो जाता है और एक नई ऊर्जा का एहसास होता है।

मंत्र के प्रत्येक शब्द  का अर्थ

ॐ = हर कण में मौजूद सृष्टिकर्ता 
भूर = जगत के जीवन का आधार पृथ्वी
भुवः = दुख़ों का अंत करने वाला
स्वः = सुख़ प्रदाण करने वाला
तत = वह परमात्मा
सवितुर = सूर्य की भांति उज्जवल
वरेण्यम् = सबसे उत्तम
भर्गो- = कर्मों का उद्धार करने वाला
देवस्य- = प्रभु
धीमहि- = आत्म चिंतन के योग्य 
धियो = बुद्धि
यो = जो
नः = हमारी
प्रचो- दयात् = अच्छे कर्मों के लिए हमें शक्ति और प्रेरणा दें। 

गायत्री मंत्र का हिन्दी मे अर्थ

प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परम परमात्मा को हम अपने हृदय के अन्तःकरण में धारण करते हैं। परमात्मा से प्रार्थना करते हैं कि हमें सदबुद्धि देना ताकि हम हमेशा सही मार्ग पर चल सकें।

गायत्री मंत्र हिन्दी अर्थ सहित

गायत्री मंत्र का इंग्लिश मे अर्थ

We worship the Supreme God from the bottom of Our Heart, He who is form of life, the destroyer of sorrow, the form of happiness, the best, the brightest, the destroyer of sin. We pray to God to give us light of wisdom so that we can always walk on the right path.

गायत्री मंत्र का इंग्लिश मे अर्थ

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गायत्री महामन्त्र जप के फायदे

नियमित रूप से मंत्र का जाप करने के अनगिनत फायदे है। जिनमे से कुछ फायदे निम्नलिखित है :-

  • गायत्री मंत्र के जप से जीवन में सुख और शान्ति आती है।
  • इस मंत्र के जाप से मन शांत होता है।
  • मंत्र जप से मन की शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है। इसके साथ ही शारीरिक विकारों का भी अन्त हो जाता है। 
  • इस मंत्र के नियमित जप से नकरात्मता दूर होती है तथा व्यक्ति हमेशा सकारात्मक विचारों से भरा रहता है।
  • कहतें है की इस मंत्र मे भाग्य बदलने की भी शक्ति है।
  • क्रोध, इर्ष्या, गुस्सा जैसी समस्याएं भी इस Gayatri Mantra के जाप से अत्यंत ही आसानी से दूर हो जाती है।
  • माना जाता है की यदि कोई व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यह मंत्र जाप करें, तो वांछित फल की प्राप्ति की संभावना प्रबल रहती है।

गायत्री मन्त्र जाप के नियम

  • Gayatri Mantra का जाप किसी भी दिन किया जा सकता है।
  • मंत्र का जप किसी एकांत स्थान में या फिर किसी मंदिर में हमेशा शांत मन और शुद्ध उच्चारण करते हुए करना चाहिए।
  • मंत्र का उच्चारण होठों से बाहर नहीं आना चाहिए। यदि ऐसा अभ्यास न हो तो बिल्कुल धीमे स्वर में मंत्र जप करें।
  • मंत्र का उच्चारण बिल्कुल शुद्ध और सही करना चाहिए।
  • ब्रह्म मुहूर्त मंत्र के पाठ के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। कई भक्त सुबह, दोपहर और संध्या काल यानि की तीनों प्रहरों मे इस मंत्र का जाप करते है। रात के समय इस मंत्र को जप करने से कुछ लोग वेसे तो मना करते है किन्तु कई लोग इस मंत्र को किसी भी समय निषेध नहीं मानते।
  • गायत्री मंत्र का जप करते समय इस मंत्र का 108 बार ( 1 माला ) जप करना चाहिए। अगर आप के पास समय का अभाव हो तो 1, 3, 7, या 9 बार भी मंत्र का जप कर सकते है।

आप अपनी सुविधानुसार गायत्री मंत्र के जप का लाभ उठायें और अपने जीवन मे उन्नति पायें।

 

Gayatri Mantra-गायत्री मंत्र

FAQ – गायत्री मंत्र को लेकर अकसर पूछे जाने वाले सवाल

गायत्री माता कौन सी देवी है?

गायत्री माता को वेदों की माता कहा जाता है। यह “वेदमाता” कहलाती है। गायत्री देवी, पंचमुख़ी माता है जो हमारी पांचों इंद्रियों और प्राणों की देवी मानी गई है।

गायत्री माता का वाहन क्या है?

गायत्री माता का वाहन हंस बतलाया गया है।

गायत्री मंत्र कहाँ से आया?

गायत्री महामंत्र एक अत्यंत परम दिव्य मंत्र है जो समस्त दुखों का अंत करने की क्षमता रखती है। गायत्री मंत्र को ऋग्वेद से लिया गया है।

गायत्री मंत्र के लेखक कौन है?

ऐसा माना जाता है कि Gayatri Mantra की रचना महर्षि विश्वामित्र ने की थी।

गायत्री मंत्र के अन्य नाम क्या है?

Gayatri Mantra को “सावित्री मंत्र” या “तारक मंत्र” भी कहते है।

Gayatri Mantra का सर्वप्रथम उल्लेख कहाँ मिलता है?

Gayatri Mantra का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है।

गायत्री मंत्र का क्या महत्व है ?

यह एक दिव्य मंत्र है। इस मंत्र को सभी मंत्रों में इसको सबसे सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त है इसीलिए इसे महामंत्र भी कहा जाता है। ऐसा कहते है की देवी देवता भी इस मंत्र की स्तुति करते है। 

गायत्री मंत्र का अर्थ क्या है?

मंत्र का अर्थ है – प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परम परमात्मा को हम अपने हृदय के अन्तःकरण में धारण करते हैं। परमात्मा से प्रार्थना करते हैं कि हमें सदबुद्धि देना ताकि हम हमेशा सही मार्ग पर चल सकें।

 

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