बैसाखी – बिशु क्यों मनाते है ! – बैशाख

बैसाखी

Vaisakhi 2017

बैसाखी अक्सर 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है। इस वर्ष २०१७ में यह १३ अप्रैल को मनाया जा रहा है | बैसाखी  पुरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है, लेकिन इसे भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न नाम से जाना जाता है जैसे बैसाख, बिशु, बीहू इत्यादि । बैसाखी का त्यौहार आते ही पूरे देश में हरियाली व खुशहाली छा जाती है।

 

बैसाखी  – बिशु क्यों मनाते है ! – बैशाख 

भारत के लगभग हर कोने में बैसाखी धूम धाम से मनाया जाता है | लोग इससे वसंत ऋतु के आगमन की खुशी में मनाते है।  यह त्यौहार बैसाखी रबी की फसल के पकने की खुशी का भी प्रतीक माना जाता  है। हालाँकि कई जगह ये बहुत ही ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है क्यों की इसको लोग अपने धर्म और पूर्वजों  से जोडकर भी देखते है |

बैसाखी , विशु ,बीहू
बैसाखी , विशु, बीहू

सिख धर्म के लोग बैशाखी मनाते है क्यों की मान्यता है कि गुरु गोविंद सिंह ने वैशाख माह की षष्ठी को खालसा पंथ की स्थापना की थी, जिस कारण बैसाखी पर्व मनाया जाता है। गुरु गोविंद सिंह ने इस मौके शीशों की मांग की, जिसे ‘दया सिंह, धर्म सिंह, मोहकम सिंह, साहिब सिंह व हिम्मत सिंह’ ने अपने शीशों को भेंट कर पूरा किया। इन पांचों को गुरु के ‘पंच-प्यारे’ कहा जाता है, जिन्हें गुरु ने अमृत पान कराया। बैसाखी  के अवसर पर मेले भी आयोजित किए जाते हैं। जो सिख सभ्यता व संस्कृति का प्रमाण देते है। युवक-युवतियाँ अग्नि जलाकर लोक-नृत्य करते व एक-दूसरे को बधाई देते।  रात के समय आग जलाकर नई फसल की खुशियाँ मनाते हुए। नये अनाज को आग में जलाया जाता है। श्रद्धालु गुरुद्वारों में जाकर गुरु नाम का जाप करते हैं। इस अवसर पर आनंदपुर साहिब में (खालसा पंथ का स्थल) भव्य कार्यक्रम किए जाते हैं। गुरु ग्रंथ साहिब को श्रद्धा पूर्वक दूध व जल से स्नान करा कर तख्त पर प्रतिष्ठित तथा पंच-प्यारों के सम्मान में शबद कीर्तन किए जाते हैं। अरदास उपरांत गुरु जी को भोग लगाया जाता है। अंत: सामूहिक भोज (लंगर) का आयोजन किया जाता है।

हिंदी में गुरु नानक देव जी के प्रेरक विचार पढने के लिए यहाँ क्लिक करें –    गुरु नानक देव जी के प्रेरक विचार

 

बैसाखी , विशु , बीहू
बैसाखी , विशु , बीहू

हिंदुओं के लिए यह त्योहार नववर्ष की शुरुआत है। हिंदु इसे स्नान, भोग लगाकर और पूजा करके मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि हजारों साल पहले देवी गंगा इसी दिन धरती पर उतरी थीं। उन्हीं के सम्मान में हिंदू धर्मावलंबी पारंपरिक पवित्र स्नान के लिए गंगा किनारे एकत्र होते हैं।

 

केरल में यह त्योहार ‘विशु‘  ( Vishu ) कहलाता है। इस दिन नए, कपड़े खरीदे जाते हैं, आतिशबाजी होती है और ‘विशु कानी’ सजाई जाती है। इसमें फूल, फल, अनाज, वस्त्र, सोना आदि सजाए जाते हैं और सुबह जल्दी इसके दर्शन किए जाते हैं। इस दर्शन के साथ नए वर्ष में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

बैसाखी , विशु , बीहू festival

आप सभी को बैसाखी की ढेरों बधाइयाँ और शुभकामनाएँ | 

 

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