Hanuman Jayanti हनुमान जयंती की शुभकामनाएं

हनुमान जयंती
हनुमान जयंती जय श्री राम #hanumanjayanti

On this auspicious occasion, May God Hanuman bless your life with peace, happiness, and prosperity. Happy Hanuman Jayanti.  Jai Bajrang Bali #HanumanJayanti

 

हनुमान जयंती के सुभ अवसर पर आप सभी को सुभकामनाएँ | भगवान हनुमान आपके जीवन को सुख, शांति और खुशहाली से भर दें | जय श्री राम | जय श्री हनुमान | जय बजरंग बली #Hanuman
HANUMAN CHALISA in Hindi

दोहा॥
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन – कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

॥ चौपाई॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ १॥
राम दूत अतुलित बल धामा ।
अञ्जनि- पुत्र पवनसुत नामा ॥ २॥
महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।
कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥ ३॥
कञ्चन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥ ४॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेउ साजै ॥ ५॥
सङ्कर सुवन केसरीनन्दन ।
तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥ ६॥
बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर ॥ ७॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम लखन सीता मन बसिया ॥ ८॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥ ९॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचन्द्र के काज सँवारे ॥ १०॥
लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥ ११॥
रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ १२॥
सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥ १३॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद सारद सहित अहीसा ॥ १४॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥ १५॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।
राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥ १६॥
तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।
लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥ १७॥
जुग सहस्र जोजन पर भानु ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ १८॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥ १९॥
दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥ २०॥
राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ २१॥
सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।
तुम रच्छक काहू को डर ना ॥ २२॥
आपन तेज सह्मारो आपै ।
तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥ २३॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।
महाबीर जब नाम सुनावै ॥ २४॥
नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥ २५॥
सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥ २६॥
सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिन के काज सकल तुम साजा ॥ २७॥
और मनोरथ जो कोई लावै ।
सोई अमित जीवन फल पावै ॥ २८॥
चारों जुग परताप तुह्मारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ २९॥
साधु सन्त के तुम रखवारे ।
असुर निकन्दन राम दुलारे ॥ ३०॥
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥ ३१॥
राम रसायन तुह्मरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥ ३२॥
तुह्मरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥ ३३॥
अन्त काल रघुबर पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥ ३४॥
और देवता चित्त न धरई ।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥ ३५॥
सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥ ३६॥
जय जय जय हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥ ३७॥
जो सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥ ३८॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥ ३९॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥ ४०॥

॥ दोहा॥
पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥

सियावर रामचंद्र की जय | पवनपुत्र हनुमान की जय ||

 

 

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