फिर से !!!!!!

फिर से ,फिर से ,आज फिर से; छलनी हुआ देश का सीना फिर से; रक्त लारियों से  भींगी धरती फिर

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मदनीय

नव समर से अपरचित , अपनो से दूर,तनिक था विचलित, निपट सोच मे गुन -धुन,गुन -धुन, रूनझुन-रूनझुन नुपूर प्रतिध्यनि ने

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