क्या आपको भी आगे बढ़ने से कोई रोक रहा है ? HIndi Motivation Story

क्या आपको भी आगे बढ़ने से कोई रोक रहा है ? HIndi Motivation Story

 

यह कहानी काफी बार सुनी है मैने कई लोगो से | जरुर आपने भी सुनी होगी | काफी प्रेरणादायक ( Motivational ) कहानी है |

यह कहानी है एक कंपनी की जिसमे एक काफी ही कड़े ( Rude / Strict ) स्वाभाव  का मालिक होता है | सारे कर्मचारी उसको पीठ पीछे भला बुरा कहते रहते है | पर मालिक को कही इधर उधर से पता चल भी जाता है तो भी वो यही सोचता है की मुझे सारे करमचारियों के काम से मतलब है | वो अपनी पूरी मेहनत से काम करें , इससे मतलब है | बाकि मेरे पीठ पीछे काम करने के बाद कौन क्या करता है , इससे क्या फर्क पड़ता है |

 

ऐसे ही ऐसे समय बीत रहा था | मालिक समय और काम के मामले में कोई कोताही बर्दास्त नहीं करता था और कर्मचारी लोग उसको यूँही पीठ पीछे भला बुरा कहते थे | एक दिन सुबह सुबह सारे स्टाफ ( कर्मचारी ) आये तो सब के टेबल के ऊपर एक एक पर्ची रखी हुई मिली | लोगो ने उस पर्ची को खोला तो | सब की पर्ची में एक ही सन्देश लिखा हुआ था |

” आप सभी लोगो को बताया जाता है की वो इंसान जो आपकी राह का कांटा था , आपकी तरक्की को रोक रहा था कल रात को उसकी मृत्यु हो गयी है | इस्सलिये आज ऑफिस बंद रहेगा | अगर आपमें से कोई भी उनका अंतिम दर्शन करना चाहे तो इस पते पे आ जाये |”

उसके निचे पता लिखा हुआ था |

हालाँकि ये पत्र पढने के बाद सबसे पहले सबको एक अनजानी सी खुशी हुई और सारे लोग एक साथ कही बाहर जा कर खुशियाँ मानना चाहते थे | कोई भी मालिक की अंतिम दर्शन में सम्मिलित नहीं होना चाहता था परन्तु आखिर वो था तो मालिक इसलिए सबने न चाहते हुए भी वहा अंतिम दर्शन में जाने का निर्णय लिया |

सारे कर्मचारी लिखित पते पर पहुंचे | वहाँ पर एक ताबूत रखा हुआ था और 2-3 लोग खड़े थे | सारे कर्मचारी समझ नहीं पा रहे थे की हम खुश होए या मालिक के मिर्त्यु पर उदास होए | खैर वहाँ खड़े एक आदमी ने एक एक करके करमचारियों को अंतिम दर्शन के लिए आगे भेजा | सारे कर्मचारी ताबूत खोलते थे फिर आश्चर्ये से देखते थे अन्दर और फिर साइड ( किनारे ) जा कर खड़े होते गए | ऐसे ऐसे करके आखरी कर्मचारी ने भी ताबूत खोला आकर | वो भी चोंक गया | क्यूँ की ताबूत के अन्दर कोई आदमी नहीं था वह एक आइना लगा हुआ था | जो भी कर्मचारी ताबूत में देखता उसको आपना ही चेहरा दीखता था | साथ में ही एक पर्ची भी रखी हुई थी जिसपर लिखा हुआ था ” आपलोग उससे मिलना चाहते थे ना जो आपकी राह का सबसे बड़ा रोड़ा है तो आज आपलोग उससे मिल लिए होंगे | जी हाँ आपकी रह का पत्थर और कोई नहीं, आप खुद हो ”

फिर सारे कराम्चारियो ने अपने मालिक को आते देखा  | अब सब को समझ आ गयी की मालिक अपनी जगह बिलकुल सही है | अनुशाशन  प्रिय है | हम ही गलत रह पर थे | सब खुद से ही सर्मिन्दा थे |

 

फिर मालिक ने सबको प्यार से देखा और कहा भाइयो केवल  एक ही व्यक्ति है जो आपके विकास की सीमा निर्धारित करने में सक्षम है वह आप खुद है। आप ही केवल वह व्यक्ति हैं जो आपकी खुशी और आपकी सफलता को प्रभावित कर सकता  हैं। और आप ही केवल वह व्यक्ति हैं जो स्वयं की मदद कर सकता हैं |  जब आपकी कंपनी बदलती है, तो आपका साथी बदलता है,  आपका बॉस बदलता है, पर आप तो वही होते है | आपका जीवन नहीं बदलता  है। आपके जीवन के हर स्थिति के लिए सिर्फ आप ही जिम्मेदार हैं।

सही है ना दोस्तों हमारा आपने ऊपर विश्वास करना बहुत महत्वपूर्ण है | और हम खुद ही जाने अनजाने आपनी सबसे बड़ी कमजोरी बन जातें है | चलिए आज से आपनी क्षमता और अपने आप को पहचानें और फिर अपनी सफलता के लिए जीजान से लग जाये |

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